Friday, July 15, 2016

देश का रक्षा परिदृश्य बदलता एक जुझारू शख्स

MODI WITH MANOHAR PARRIKAR
           रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर आजकल सुर्खियों में हैं। थलसेना के 11 लाख सैनिकों, 1 लाख 40 हजार वायुसैनिकों और सत्तर हजार नौसैनिकों के अगुआ पर्रिकर हर दिन नई उपलब्धियां गढ़ रहे हैं। पर्रिकर और उनकी उपलब्धियों पर बात करने से पहले यह बताना जरूरी है कि केंद्र में मंत्री बनना किसी भी सत्तारूढ़ दल के नेताओं का सपना होता है, लेकिन ‘अपना गोवा’ छोड़कर केंद्र की राजनीति में आए पर्रिकर की जान कहीं वहीं बसी है। इस बात का पता उनकी इस स्वीकारोक्ति से चलता है कि दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा बनने के लिए उन्हें की गई पेशकश से वह बचना चाह रहे थे, और उन्हें इस मुद्दे पर फैसला करने में दो हफ्ते लगे। कुछ दिन पहले पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, ‘26 अक्टूबर को मैं गोवा के खनन मुद्दे पर बात करने और राज्य के लिए वित्तीय मदद हासिल करने के उद्देश्य से (प्रधानमंत्री) मोदी से मिलने गया था.. उन्होंने कहा कि वह सब करेंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने मुझसे सवाल किया, ‘आप केंद्रीय कैबिनेट में क्यों नहीं आ जाते..?’ यह सुनकर मुझे ऐसा लगा, जैसे किसी ने मेरे सिर पर बम फोड़ दिया हो..। पर्रिकर ने बताया, ‘मैंने कहा, मैं इस बारे में सोचूंगा, और चला आया.. मैंने तय कर लिया कि अब अगले दो-तीन महीने तक लौटकर (दिल्ली) जाऊंगा ही नहीं.. लेकिन चार-पांच दिन बाद ही मेरे पास रिमाइन्डर भेज दिया गया..’ और इस तरह पर्रिकर केंद्रीय मंत्री बन गए और उन्हें रक्षा मंत्रालय जैसा अहम विभाग सौंपा गया। केंद्र में आकर उन्होंने गोवा के अपने वर्क पैटर्न को अपनाया। आज मोदी कैबिनेट के जिन दो मंत्रियों के काम की समसे अधिक तारीफ हो रही है, वे हैं सुरेश प्रभु और मनोहर पर्रिकर। पर्रिकर ने कई मिसालें पेश की हैं। प्रोटोकॉल के तहत उन्हें विशेश सरकारी विमान उपलब्ध है, लेकिन वह यात्री विमान का उपयोग करते हैं। बोर्डिंग के समय वह लाइन में लग कर विमान में दाखिल होते हैं।
         पर्रिकर ने एक योजना के साथ पद संभाला है। वह भारत को रक्षा के क्षेत्र में निर्यात का हब बनाने का सपना देख रहे हैं। उनका दावा है कि जब केंद्र में एनडीए की सरकार आई है, रक्षा खरीद का प्रतिशत दस प्रतिशत घटा है। दो साल पहले तक हम सत्तर फीसद सैन्य साज-ओ-सामान आयात करते थे, जो अब साठ पर आ गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम चल रहा है। जल्द ही आयात का ग्राफ और नीचे जाएगा। इसके उलट, तेजस फाइटर प्लेन और अन्य रक्षा उपकरण भारत निर्यात करने की तैयारी में है।